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How to verify deepfake videos: कैसे पहचानें नकली वीडियो? खोलकर रख दिया 'काला चिट्ठा'...

हमने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी (AI Technology) से पूछा कि किसी डीपफेक वीडियो की पहचान कैसे की जा सकती है. AI ने कुछ अहम बिंदुओं का ब्यौरा दिया, जो हम आपके साथ साझा कर रहे हैं. यह जानकारी जरूर आपके काम आएगी.

    नई दिल्ली. डीपफेक (DeepFake) शब्द इन दिनों बहुत चर्चा में है. दो दिन पहले अभिनेत्री रश्मिका मंदाना के चेहरे वाली एक लड़की का वीडियो वायरल हुआ. रश्मिका की तरफ से कहा गया कि वह वीडियो फेक है. हालांकि, इस तरह के वीडियो बाहर आने के बाद बड़े स्टार अकसर यही कहते हैं कि वीडियो फेक है. राजनीति में भी ऐसा ही होता है. परंतु, हैरानी तब हुई, जब फैक्ट चेक करने पर साफ हो गया कि वह वीडियो असल में रश्मिका मंदाना का नहीं था. वीडियो एक सोशल मीडिया इन्फ्लूएंसर ब्रिटिश-इंडियन लड़की जारा पटेल का था.

    वायरल वीडियो पर खूब हंगामा हुआ और यहां तक कि बॉलीवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन तक ने चिंता जाहिर कर दी. सरकार के भी कान खड़े हो गए और सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी कर दिया. सरकार ने कहा कि इस तरह का फेक कंटेंट उनके प्लेटफॉर्म पर जगह न पाए.

    इस बीच बड़ा सवाल यही उठा है कि कल को किसी और स्टार का या फिर आपका इसी तरह का वीडियो वायरल हो जाए तो क्या होगा? रश्मिका मंदाना एक बड़ी स्टार हैं तो उन्होंने इस मामले को संभाल लिया. उन्होंने कहा कि यदि वे स्टूडेंट होतीं और ऐसा वीडियो आता तो फिर क्या होता? इसके बाद एक प्रश्न और उठता है कि इस बात का पता कैसे लगाया जाए कि वीडियो सही है या डीपफेक है? इस सवाल का उत्तर भी हमने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस टेक्नोलॉजी (AI Technology) से ही पूछा. हमें जो उत्तर मिला, उसी के आधार पर आपको जानकारी दे रहे हैं.

    पहले हमें यह बात ध्यान में रख लेनी चाहिए कि इस तरह की टेक्नोलॉजी आम हो चुकी है. डीपफेक वीडियो भी धड़ल्ले से चल रहे हैं. हालांकि अच्छे से बनाए गए एक डीपफेक वीडियो और ओरिजिनल वीडियो में बहुत अधिक फर्क नहीं होता, परंतु अच्छी बात ये है कि डीपफेक वीडियो को पहचान पाना मुमकिन है.

    कैसे पहचानें कि वीडियो डीपफेक है?
    इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि डीपफेक वीडियो का पता लगाना मुश्किल है, लेकिन कुछ छोटे-छोटे ऐसे संकेत दर्शकों को यह पहचानने में मदद कर सकते हैं कि क्या असली है और क्या नहीं. नीचे हमने कुछ संकेतों का जिक्र किया है –

    लाइटिंग या कलर मैच नहीं करते
    टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करते हुए नकली वीडियो बनाना बहुत आसान काम है. परंतु, फिर भी डीपफेक बनाने वाले चेहरे के प्रॉपर कलर और लाइटिंग को वैसा ही नहीं बना सकते, जैसा कि ओरिजिनल में होता है. डीपफेक चेहरों में अक्सर वास्तविक नहीं दिखने वाली विशेषताएं होती हैं, जैसे धुंधली त्वचा, बहुत चिकनी त्वचा, या अन-नेचुरल बाल. कलर की टोन और लाइटिंग को मैच करना जटिल है. ऐसा इसलिए होता है कि ओरिजिनल वीडियो में जो लाइटिंग होती है, वैसी ही लाइटिंग दूसरी जगह पर नहीं मिलती. जब किसी दूसरे का चेहरा काटकर उसका डीपफेक किया जाता है तो कलर मिसमैच होना लाजिमी है. यह बात अलग है कि इस तरह से सच जान लेना आसान काम नहीं है.

    आंखों का मूवमेंट
    चूंकि जिस वीडियो को अल्टर करके फेक किया गया है, उसमें इंसान की आंखों की मूवमेंट कुछ अलग होगी. ओरिजिनल वीडियो में मौजूद शख्स की आंखों की मूवमेंट मैच नहीं करेगी. डीपफेक वीडियो में पलक झपकने की समस्या हो सकती है. वीडियो में दिख रहा व्यक्ति बहुत बार, बहुत धीरे-धीरे, या बिल्कुल भी पलकें नहीं झपका सकता है. यदि आपको लगे की आंखों की मूवमेंट सही नहीं है तो समझा जा सकता है वीडियो फेक होगा. हालांकि आगे इसकी और पड़ताल करनी होगी.

    बॉडी मूवमेंट और बॉडी की शेप
    उदाहरण के लिए जारा पटेल और रश्मिका वाले इसी वीडियो की बात करते हैं. आप यदि बॉडी पर नजर डालेंगे तो समझ जाएंगे कि रश्मिका की हाईट जारा पटेल से ज्यादा दिखती है और डीपफेक वीडियो वाली रश्मिका की हाइट कम लग रही है. अब यदि कोई सलमान खान के चेहरे को लेते हुए डीपफेक वीडियो बनाए तो भी आप समझ जाएंगे कि यह बॉडी, चाल-ढाल सलमान जैसी नहीं है.

    VIDEO:
    Ayodhya Deepotsav 2023 : 21 लाख दीपों से रोशन होगी रामनगरी. | UP News | CM Yogi | ANI

    ऑडियो क्वालिटी
    डीपफेक वीडियो का ऑडियो हमेशा AI से बनाया गया होगा. डीपफेक वीडियो में अक्सर लिप सिंकिंग संबंधी त्रुटियां होती हैं, खासकर तब जब वीडियो में मौजूद व्यक्ति मूल भाषा के अलावा कोई अन्य भाषा बोल रहा हो. यदि आप ध्यान से सुनेंगे तो AI का ऑडियो आसानी से पकड़ा जा सकता है. AI काफी हद तक नकल कर लेता है, मगर पूरी तरह से नहीं.

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