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Sultanpur news: सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी के जरिए मनमानी तरीके से विवेचना ट्रांसफर करने का लगा आरोप...

 विवेचना ट्रांसफर मामले में सीओ सिटी का मनमाना आदेश आया सामने,कोतवाली नगर से जुड़े हत्या के प्रयास मामले में सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी के जरिए मनमानी तरीके से विवेचना ट्रांसफर करने का लगा आरोप,बिना पुलिस अधीक्षक या अन्य किसी सक्षम अधिकारी के आदेश के सीओ ने अपने आदेश में विवेचना ट्रांसफर का बिना कोई सटीक कारण दर्शाए जनहित की बात कहते हुए विवेचना हटाने का कर दिया आदेश,जिले से लेकर हाईकोर्ट स्तर तक मामले में फंसा है पेंच


बीते 10 सितंबर को बच्चों के विवाद को लेकर तुराबखानी इलाके में अभियोगी इसरार हुसैन के पुत्र इमरान व अन्य पर आरोपियों ने लोहे की राड समेत अन्य हथियारों से किया था हमला,इमरान के सिर पर गंभीर चोट पहुंचाने के अलावा कूल्हे की हड्डी तोड़ने का है आरोप,मामले में अभियोगी इसरार हुसैन ने मो. सकलेन शहंशाह,आरोपी सगे भाई मो. शिफ़लेन,अली हसनैन एवं आरोपी सगे भाई अली मोहम्मद व मो. सलमान के खिलाफ दर्ज कराया है मुकदमा,भादवि की धारा-307 समेत अन्य गंभीर धाराओ में दर्ज है मुकदमा,जुलूस में बच्चों के बीच हुई कहासुनी के बाद बढ़ गया था विवाद


मामले में अमहट चौकी प्रभारी रामेंद्र वर्मा ने आरोपी अली हसनैन को गिरफ्तार कर की थी जेल भेजने की कार्रवाई,वहीं शेष आरोपियो के फरार होने की दशा में करीब एक माह पहले की गई थी एनबीडब्ल्यू व 82-दण्ड प्रक्रिया संहिता की कार्रवाई,फिर भी नहीं पकड़ में आ सके मुलजिम,वहीं आरोपियों के जरिए हाईकोर्ट स्तर पर बड़ा खेल करने का मामला आया सामने,अभियोगी ने शिकायत कर लगाए है गम्भीर आरोप,आरोपियों के जरिये फर्जी सुलहनामा लगाकर गिरफ्तारी पर रोक सम्बन्धी आदेश करा लेने की बात आई सामने,मिली जानकारी के मुताबिक आरोपियों ने दोनों पक्षों के बीच सुलहनामा की बात दर्शाकर एवं इस संबंधी कागजात हाईकोर्ट में दाखिल कर बीते 23 नवम्बर को गिरफ्तारी पर रोक संबंधी पा लिया था आदेश,फिलहाल हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक लगाने का आदेश देने के साथ-साथ दाखिल सुलहनामे की जांच करने एवं नियमानुसार उचित कार्रवाई के लिए पुलिस को दिया था निर्देश,जिसके क्रम में विवेचक रामेंद्र वर्मा ने अपनी जांच में सुलहनामा की बात पाई झूठी,वादी पक्ष ने कई लोगो के शपथपत्र के साथ सुलहनामे को बताया है फर्जी,विवेचक रामेंद्र वर्मा ने बीते सात दिसंबर को अपनी जांच में सुलहनामा की बात झूठी बताते हुए एवं हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए अर्जी देकर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से की थी आरोपियों के खिलाफ उचित स्टेप लेने के लिए यथोचित आदेश की मांग,जिस पर संज्ञान लेते हुए सीजेएम ने अगले दिन आठ दिसंबर को मामले में सुलहनामे का कथन झूठा पाने की दशा में नियमानुसार कार्रवाई का दिया था निर्देश


इसी के बाद आठ दिसंबर को ही सीओ सिटी राघवेंद्र चतुर्वेदी के जरिए जनहित की बात दर्शाते हुए विवेचना दरोगा रामेंद्र वर्मा से हटाते हुए गभड़िया चौकी प्रभारी विकास गुप्ता को सौंपने का दे दिया गया आदेश,दरोगा विकास गुप्ता के नाम पर विवेचना ट्रांसफर करने के आदेश से सीओ की कार्यशैली पर उठा सवाल,आखिर उनके जरिए क्यों और कैसे डायरेक्ट विवेचना ट्रांसफर करने संबंधी दे दिया गया आदेश,उच्चाधिकारियो को बिना जानकारी दिये एवं बिना अनुमति के विवेचना ट्रांसफर करने का क्यों दे दिया गया आदेश,विवेचना हटाने का कारण का भी नहीं किया गया है उल्लेख,बिना किसी विशेष परिस्थिति के सामान्य परिस्थितियों में नहीं हटाई जा सकती है विवेचना,डीजीपी मुख्यालय समेत अन्य ऊंची संस्थाओं से इस संबंध में पुलिस अधिकारियों के लिए जारी है निर्देश,बावजूद इसके सीओ सिटी के जरिए मनमाना आदेश करने का मामला आया सामने


मिली जानकारी के मुताबिक पूर्व विवेचक रामेंद्र वर्मा की कार्रवाई से बौखलाए मुलजिम पक्ष ने दरोगा के खिलाफ तीन लाख रुपये की डिमांड करने का लगाया था आरोप,जबकि एक माह पहले ही आरोपियों को अपराध में वांछित बताते हुए एनबीडब्ल्यू व 82 की अपनाई जा चुकी है कार्रवाई तो ऐसे में अपने ही जरिये की गई खिलाफ कार्रवाई को लेकर क्यों कोई जांच अधिकारी करेगा सौदा,महज पेशबंदी में माना जा रहा दरोगा के जरिये मुल्जिमो से डिमांड का आरोप,इस तरीके के बहुत आरोप आते रहते है सामने लेकिन सीओ सिटी या अन्य अफसर विवेचना हटाने के लिए जल्दी नहीं उठाते कोई कदम,आखिर इस मामले में बिना किसी ठोस आधार व साक्ष्य के आरोपी पक्ष की मांग के समर्थन में सीओ सिटी ने क्यों हटा दी विवेचना,जबकि डीजीपी मुख्यालय से जारी निर्देश के मुताबिक पुलिस अधीक्षक या अन्य सक्षम अधिकारी को ही विशेष परिस्थिति में विवेचना ट्रांसफर करने का है अधिकार,क्षेत्राधिकारी एवं अपर पुलिस अधीक्षक स्तर पर बिना उच्चाधिकारी के निर्देश के नहीं हटाई जा सकती विवेचना,वह भी वादी पक्ष को बिना जानकारी दिए एवं उसके पक्ष को बगैर सुने इस तरीके के आदेश से सीओ सिटी की कार्रवाई पर उठ रहा सवाल,आखिर क्यों दरोगा विकास गुप्ता के नाम से उनके पास ट्रांसफर की गई विवेचना,अभियोगी पक्ष के मुताबिक बेखौफ होकर घूम रहे आरोपी एवं उनके करीबियों के जरिए लगातार मिल रही धमकी,पीड़ित पक्ष ने बताया जान को खतरा,पुलिस की लचर कार्रवाई के चलते अभियोजन पक्ष डर कर बिता रहा जिंदगी,आरोपियों की बताई जा रही लम्बी क्रिमिनल हिस्ट्री,पूरे मामले में सेटिंग-गेटिंग का खेल आ रहा सामने,जिम्मेदार अफसरो की भूमिका संदिग्ध,हाईकोर्ट में आरोपियों के जरिये फर्जी सुलहनामा दाखिल करने को लेकर भी अभियोगी पक्ष ने शुरू की है कार्यवाही,सुलहनामा फर्जी मिलने पर आरोपियों पर हाईकोर्ट स्तर से भी हो सकती है कार्रवाई


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