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माघ शुक्ल पक्ष की बसंत पंचमी पर 14 लाख 70 हजार लोगों ने लगाई आस्था की डुबकी...

इस बार ग्रह नक्षत्रों की स्थिति माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को बेहद खास बना रही है. बसंत पंचमी का पर्व माघ मास की शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है‌. रेवती के साथ अश्वनी नक्षत्र का संयोग बना रहा है. इसके साथ ही गजकेसरी योग के चलते विशेष लाभकारी योग भी बन रहा है.इस बार माघ मेला 15 जनवरी 2024 से शुरू है.देश विदेश से लोग माघ मेले में स्नान करने के लिए आते हैं. पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, संगम तट पर स्नान करने से हर तरह के पाप धुल जाते हैं और कष्टों से मुक्ति मिलती है. मकर संक्रांति से शुरू होने वाला यह माघ मेला महाशिवरात्रि के दिन स्नान करने के साथ समाप्त होता है.

ऋषभ देव द्विवेदी

संवाददाता, प्रयागराज जोन

प्रयागराज. संगम की रेती पर लगे माघ मेले के चौथे स्नान पर्व बसंत पंचमी के मौके पर आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा है. संगम नगरी में आस्था और श्रद्धा के साथ बसंत पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है. इस मौके पर कड़ाके की ठंड के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा, यमुना सरस्वती की त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. तमाम संत महात्मा और श्रद्धालु पीले कपड़े पहन कर त्रिवेणी की धारा में आस्था की डुबकी लगा रहे हैं. इसके साथ ही संतों के पंडालों व दूसरी जगहों पर ज्ञान और विद्या की देवी सरस्वती पूजी जा रही हैं. बसंत पंचमी के मौके पर 80 लाख से ज्यादा श्रद्धालुओं के माघ मेले में स्नान करने का अनुमान है.

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इस बार ग्रह नक्षत्रों की स्थिति माघ शुक्ल पक्ष की पंचमी को बेहद खास बना रही है. बसंत पंचमी का पर्व माघ मास की शुक्ल पंचमी तिथि को मनाया जाता है‌. रेवती के साथ अश्वनी नक्षत्र का संयोग बना रहा है. इसके साथ ही गजकेसरी योग के चलते विशेष लाभकारी योग भी बन रहा है. इस दिन पवित्र नदी में स्नान करने से बुद्धिबल का विकास होता है और सभी मनोकामनायें पूरी होती हैं. साधकों, विद्यार्थियों, कल्पवासियों के पीले वस्त्र धारण कर और पीला चंदन लगाकर स्नान करना चाहिए. त्रिवेणी में आस्था की डुबकी लगाने से श्रद्धालुओं के शरीर के साथ ही आंतरिक काया का भी शुद्धिकरण होता है. आज ब्रह्म मुहूर्त से पूरे दिन बसंत पंचमी के स्नान का पुण्य लाभ श्रद्धालुओं और कल्पवासियों को मिलेगा.

सुरक्षा के विशेष इंतजाम

माघ मेले में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं. माघ मेला क्षेत्र में 3000 रनिंग फीट से ज्यादा के 12 स्नान घाट बनाए गए हैं. माघ मेला 768 हेक्टेयर में 6 सेक्टर में बसाया गया है. माघ मेले में पहली बार 6 पान्टून ब्रिज बनाए गए हैं. पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का माघ में प्रयोग हो रहा है. माघ को पूरी तरह से प्लास्टिक फ्री घोषित किया गया है. 100 किलोमीटर चकर्ड प्लेटें बिछाकर सड़कें बनाई गई हैं. 200 किलोमीटर की पाइपलाइन और 65 किलोमीटर ड्रेनेज पाइपलाइन व 21 हजार शौचालय बनाए गए हैं. माघ मेले में ठंड के मद्देनजर अलाव और श्रद्धालुओं के लिए रैन बसेरे का इंतजाम किया गया है. सुरक्षा के लिए भी चाक चौबंद इंतजाम किए गए हैं. पुलिस पीएसी पैरामिलिट्री के साथ एटीएस और एसटीएफ की तैनाती की गई है. स्नान घाटों पर जल पुलिस, गोताखोर, फ्लड कंपनी पीएसी एनडीआरएफ और एसडीआरएफ तैनात की गई है. संगम की रेती पर आयोजित माघ मेला 8 मार्च महाशिवरात्रि के पर्व तक चलेगा. यह माघ मेला 2025 के महाकुंभ का रिहर्सल भी माना जा रहा है.

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