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...आखिर क्यों नशे की आदी हो रही युवा पीढ़ी!

 आज युवाओं के नशे का मुख्य कारण यह है कि अपने सहनशक्ति की कमी । दिश का युवा वर्ग आज नशे की गिरफ्त में फंसता जा रहा है। युवा आजकल बहुत जल्दी अपना हौसला खो देते हैं, जिसका परिणाम यह होता है कि वे डिप्रेशन में चले जाते और फिर वे नशे की गिरफ्त में फंस जाते हैं।

बच्चों का जन्म जब होता है तो माता-पिता खुशी से फूले नहीं समाते हैं और उनके अरमान इतने ज्यादा बढ़ जाते हैं कि हम अपने बेटे या बेटी को बड़ा होकर एक अच्छी पदवी पर देखना चाहते हैं, लेकिन आज की युवा पीढ़ी मां-बाप को धोखा देकर उनके अरमानों को चकनाचूर करते हुए नशे को अपना साथी मान रही है। जो उनके स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो ही रहा है। साथ में भविष्य भी अंधकार बनता जा रहा है। बचपन में मां-बाप अपने बच्चों को उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं, कंधों पर बिठाते हैं कई तरह की लोरियां सुनाते हैं लेकिन आज वही भविष्य माता-पिता के सपनों को चकनाचूर कर रहा है। 

उत्तर प्रदेश सहित भारत में नशे की लत युवाओं के बीच में इतनी बढ़ चुकी है जिसका अंदाजा आए दिन समाचार पत्रों में पढऩे को मिलता है कि युवाओं से नशीले पदार्थ पकड़े गए और कुछ नशे की लत के लिए पैसे न मिलने पर मां-बाप के ऊपर हमला कर दे रहे हैं। जिसके कारण मां-बाप मृत्यु की आगोश में समा रहे हैं और वह नशे से चूर होते जा रहे हैं। यह नशा समाज के प्रत्येक वर्ग को खोखला कर रहा है, लेकिन अकेली सरकारें कुछ नहीं कर सकती हैं जब तक जन-सहयोग समाज में नहीं मिलता है तब तक समाज नशा मुक्त नहीं हो सकता है। नशे के सौदागरों को समाज और पुलिस मिलकर समाप्त कर सकती है। जब तक समाज के बुद्धिजीवी लोग पुलिस और प्रशासन का सहयोग नहीं देंगे, तब तक यह नशा बढ़ता ही रहेगा। आज देखने और सुनने को मिलता है कि स्कूल और कॉलेजों में पढऩे वाले छात्र भी नशे की चपेट में आ चुके हैं। यही नहीं कहीं-कहीं बड़े संस्थानों में तो लड़कियां भी इसकी चपेट से अछूती नहीं हैं। जो समाज के लिए बहुत बड़ा कलंक है। 

स्कूल और कॉलेजों के बाहर मादक पदार्थों को बेचने के लिए प्रतिबंध लगाया गया है लेकिन फिर भी देखने को मिलता है कि इसके सौदागर चोरी छुपे स्कूल या कॉलेजों के बच्चों को इस्तेमाल करके इस नशे की खेप को संस्थान और होस्टल तक पहुंचा रहे हैं जो एक गंभीर समस्या उभर रही है। नशे की लत एक ऐसी गंभीर और विनाशकारी समस्या है जिसने हमारे देश की युवा पीढ़ी को कठोर रूप से फंसा लिया है, आज अगर हम आंकड़े देखते हैं तो 17-20 की शुरूआत में अधिकांश किशोरों को अनैतिक पदार्थ के दुरुपयोग या नशे की लत के लिए गंभीरता से आदी पाया गया है। यहां तक कि गैर-कानूनी और गरीब बच्चे भी नशीली दवाओं के दुरुपयोग व्यसन में शामिल हुए हैं। इसे सरकार के सामने एक खतरनाक मुद्दे के रूप में सामने रखा गया है क्योंकि युवा पीढ़ी देश के भविष्य के लिए संभावित शक्ति है और यदि उनके वर्तमान जीवन इस तरह के व्यसनों के तहत डूब गए हैं तो देश का भविष्य निश्चित रूप से अंधेरे में बदल जाएगा। यह वास्तव में भारतीय समाज के लिए भी एक गंभीर मामला है, और इस मामले को समाज के लोगों के सामूहिक प्रयासों के साथ हल किया जाना चाहिए। समाज का वर्तमान परिदृश्य पहले के मुकाबले पूरी तरह से बदल गया है। अब शहरी क्षेत्रों में परिवार एकल हो रहे हैं। माता-पिता दोनों कामकाजी हैं इसलिए वे अपने बच्चों को गुणात्मक समय नहीं दे पा रहे हैं। 

नैतिक मूल्यों में महत्व और विश्वास परिवारों में भी कम हो गया है, बड़ों की उपेक्षा हो रही है, बच्चे ज्यादातर समय अपने घरों से बाहर किसी को सांझा करने और खुद को अभिव्यक्त करने के लिए देखते हैं और यह भी कभी-कभी उन्हें गलत साथियों के समूह में शामिल करने के लिए प्रेरित करता है। परिवार के सदस्यों के बीच संचार, बातचीत, समझ धीरे-धीरे कम हो रही है और आधुनिक शिक्षा प्रणाली ने भी छात्रों पर बहुत दबाव डाला है, गरीब परिवारों में अत्यधिक गरीबी के कारण माता-पिता और बच्चे सभी आजीविका कमाने में लगे हुए हैं। शिक्षा प्राप्त करने के लिए पैसा और समय नहीं है और इस प्रकार अशिक्षा अनैतिक कार्यों और दोस्तों की बुरी संगत में शामिल होती है। 

प्रारंभिक अवस्था में किसी को यह एहसास नहीं हो सकता है कि नशीली दवाओं का उपयोग कब एक लत में बदल सकता है और जिस क्षण यह एक लत बन जाती है। बहुत देर हो चुकी होती है, इसलिए माता-पिता, बड़ों और दोस्तों को हमेशा सावधान और सतर्क रहना चाहिए। शायद सबसे गंभीर चिंता 14-15 वर्ष की आयु के युवाओं की भागीदारी है.

#Womendayspecial | महिलाओं को एक दूसरे के साथ चलने का नाम है महिला सशक्तीकरण | Sultanpur

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