Skip to main content

झोलाछाप डाक्टर के ऊपर स्वास्थ्य विभाग ने कसा नकेल, शहर में टीम ने मारा छापा...

बोर्ड पर लंबी डिग्रियों का झांसा,जबकि छारसूत्र जैसी डिग्री के सहारे खुद को सबसे बडा स्पेशलिस्ट साबित करके मरीजों को ठगने का किया जा रहा है काम

विशेष संवाददाता:

सुल्तानपुर जनपद में फर्जी झोलाछाप डाक्टरों पर मुख्य चिकित्साधिकारी डाक्टर ओम प्रकाश चौधरी की भृकुटी तिरछी हो गई है,मुख्य चिकित्साधिकारी के द्वारा स्पष्ट शब्दों में कहा गया है की ऐसे फर्जी डाक्टरों पर विभाग गंभीर कार्यवाई करेगा,सीएमओ द्वारा गठित टीम ने शहर के नार्मल कंपाउंड स्थित सुपर मार्केट में औचक छापा मारा गया,सुपर मार्केट मेडिकल मंडी के नाम से मशहूर है,यहा जिले के ही नही प्रदेश के नामचीन डाक्टरों की ओपीडी होती है,इन्ही के बीच में फर्जी डिग्री भी अपनी दुकान खोलकर मरीजों की जिदगी से खेल रहे है,इसकी सूचना पर जिले के स्वास्थ्य विभाग मुखिया डाॅ ओम प्रकाश चौधरी द्वारा डिप्टी सीएमओ डाॅ पीडी त्रिपाठी,वरिष्ठ सहायक विजय राय,वसीम अहमद व सुशील कुमार सिंह की टीम बनाकर सुपर मार्केट में चलने वाले फर्जीवाड़े पर कार्यवाई करने के निर्देश पर टीम ने छापामारी की,टीम ने मौके पर कई डाक्टरों की वास्तविकता खंगाली,टीम ने सुपर मार्केट में चर्मरोग विशेषज्ञ बताने वाले डाॅ पीके त्रिपाठी न्यू सिटी मेडिकल स्टोर व डिहवा स्थित या वारिस नूर क्लिनिक पर छापा मारा,छापेमारी से सुपर मार्केट में अफरा तेरी का माहौल रहा,बहरहाल मौके पर स्वास्थ्य विभाग की टीम को डाॅ पीके त्रिपाठी व या वारिस नूर क्लिनिक के द्वारा कोई भी अभिलेख नही उपलब्ध करवाया जा सका,सीएमओ के निर्देश पर डाॅ पीके त्रिपाठी और या वारिस नूर क्लिनिक को तीन दिन का समय दिया गया है,समय सीमा के अंदर यदि इनके द्वारा अभिलेख उपलब्ध नही कराया जाता तो आगे विभागीय ठोस कार्रवाई की जाएगी।



Comments

Popular posts from this blog

कागज़ की किताबें या “सोने-चांदी” का कारोबार ? शिक्षा माफियाओं की मनमानी पर सवाल

अभिभावकों की जेब पर बढ़ता बोझ, निजी स्कूलों, प्रकाशकों की सांठगांठ पर उठे गंभीर प्रश्न सुल्तानपुर       जिले में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली पाठ्यपुस्तकों की कीमतों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आम धारणा बनती जा रही है कि कागज़ से छपने वाली इन किताबों के दाम ऐसे वसूले जा रहे हैं, मानो वे “सोने-चांदी” से तैयार की गई हों। स्थानीय स्तर पर कई अभिभावकों का कहना है कि हर साल नए सत्र में स्कूलों द्वारा निर्धारित की गई किताबें केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं, जहां उनकी कीमत बाजार दर से कहीं अधिक होती है। इससे यह संदेह गहराता है कि स्कूल प्रबंधन और प्रकाशकों के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत है। विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली मोटी किताब छापने की वास्तविक लागत इतनी अधिक नहीं होती,जितनी कीमतपाठ्य पुस्तकों की कीमत छात्रों से वसूली जाती है। इसके बावजूद, अभिभावकों को मजबूरन वही किताबें खरीदनी पड़ती हैं, क्योंकि स्कूलों में अन्य विकल्प स्वीकार नहीं किए जाते। शिक्षा माफियाओं का जाल? ...

चढ़ावे की चोरी का पैसा जमीन-मकान में लगा? अयोध्या में दो और कर्मी पकड़े गए: सूत्र

अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में ट्रस्ट के दो और कर्मचारियों को पकड़ा गया है, जिन्होंने चोरी के पैसे से करोड़ों रुपये की जमीन और मकान खरीदे हैं। जांच एजेंसियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों का मासिक वेतन मात्र 18 से 20 हजार रुपये था, लेकिन हाल ही में इन्होंने करोड़ों की संपत्तियां अपने नाम की थीं। इस मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं: संदिग्ध कर्मचारी और खरीदी गई संपत्तियां लवकुश मिश्रा : मंदिर के दान-गिनती विभाग (कैलकुलेशन रूम) में काम करने वाले इस कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। इसने अयोध्या में 40 लाख रुपये का एक भूखंड खरीदा और उस पर मकान का निर्माण शुरू करवाया। छापेमारी के दौरान इसके घर से करीब 10 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है, जिसे अलमारी और गोबर के ढेर में छुपाकर रखा गया था।   तिवारी (गर्भगृह कर्मी) : राम मंदिर के गर्भगृह में तैनात इस कर्मी के पास भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी थी। इसने कुछ महीने पहले अयोध्या में 1.5 करोड़ रुपये की महंगी जमीन खरीदी थी। जांच और बड़ी कार्रव...

16 से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया!

कोर्ट की टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या भारत में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टाग्राम के दरवाजे बंद होने वाले हैं?" मदुरै (तमिलनाडु): सोशल मीडिया की दुनिया बच्चों की मासूमियत के लिए अब एक बड़ा खतरा बनती जा रही है. अश्लील सामग्री की आसान पहुंच और रील की लत से बच्चों को बचाने के लिए अब मद्रास हाई कोर्ट ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है. ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लगे सोशल मीडिया बैन का उदाहरण देते हुए अदालत ने केंद्र सरकार से भारत में भी इसी तरह की पाबंदी लागू करने पर विचार करने को कहा है. मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने केंद्र सरकार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया वेबसाइटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है. न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की. केंद्र और राज्य सरकारों ने इस मामले पर अपने तर्क पेश किए. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीशों ने अपना आदेश जारी किया. पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2017 में जारी आदेश के अनुसार, यह पुष्टि हो चुकी है कि ऐसे विवादास्पद और अश्लील ...