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अवैध हुक्का बारों का मकड़जाल: कब लगेगी कानूनी लगाम?

राजधानी लखनऊ में अवैध हुक्का बारों का गोरखधंधा रुकने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदेश के मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश के बावजूद यह धंधा बेखौफ तरीके से फल-फूल रहा है।

हाल ही में 2 दिन पहले कमिश्नरेट पुलिस ने गॉडफादर हुक्का बार पर बड़ी कार्रवाई की थी, लेकिन अगले ही दिन यह रसूखदारों की ताकत के बलबूते फिर से संचालित हो गया। यही नहीं, इसके नजदीक द कैरेबियन नामक एक और अवैध हुक्का बार भी खुलेआम चल रहा है।

हुक्का बार में भीषण आग और प्रशासन की लापरवाही

 10 दिसंबर 2024, रात करीब 9:30 बजे हुक्का ब्रदर्स कैफे में भीषण आग लग गई। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की तीन गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और आग पर काबू पाया। घटना स्थल पर क्षेत्रीय पुलिस भी मौजूद रही, लेकिन पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। कैसरबाग कोतवाली पुलिस रसूखदारों के सामने पूरी तरह नतमस्तक नजर आई।

कानून पर भारी रसूखदारों का दबदबा

सवाल यह उठता है कि पुलिस द्वारा छापेमारी के बाद अगले ही दिन हुक्का बार कैसे चालू हो जाते हैं? आखिर पुलिस की क्या मजबूरी है जो इन अवैध गतिविधियों पर लगाम नहीं लगा पा रही? रसूखदार कानून को अपनी जेब में रखकर इसे खुलेआम तोड़ते नजर आते हैं।

प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल

यह स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब ऐसी घटनाओं के बाद भी ठोस कार्रवाई नहीं होती। हुक्का ब्रदर्स कैफे में आग लगने जैसी घटनाएं बड़े हादसों की चेतावनी हैं। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस हादसे को लेकर गंभीर कार्रवाई करेगा या फिर मोटी डील के आगे चुप्पी साध लेगा।

जनता में बढ़ रहा आक्रोश

लखनऊ की जनता इन अवैध हुक्का बारों और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर बेहद नाराज है। अब समय आ गया है कि जिम्मेदार अधिकारी और प्रशासनिक तंत्र इस गोरखधंधे पर सख्त कार्रवाई करें, ताकि राजधानी को इन अवैध गतिविधियों से मुक्त किया जा सके।

फैसला किसके पक्ष में होगा – कानून या रसूखदार?

अवैध हुक्का बारों पर कानूनी लगाम कब लगेगी, यह देखना बाकी है। लेकिन यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो यह स्थिति राजधानी की सुरक्षा और कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बन सकती है।

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