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दलालों के आगे नतमस्तक है मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य, धड़ल्ले से लिखी जा रही बाहरी दवाएं...

 अस्पताल के ओपीडी में बैठा मनबढ़ दलाल सरकारी पर्चा आपने हाथों में लेकर लिखवा रहा है बाहर की मंहगी दवाइयां।

रिपोर्ट: पवन विश्वकर्मा 

सुलतानपुर। अक्सर विवादों की सुर्खियों में रहने वाला बहुचर्चित मेडिकल कॉलेज सुलतानपुर में तैनात जिम्मेदार स्वास्थ अधिकारी और चिकित्सक अपनी करतूतों से बाज नहीं आ रहे है। यही नहीं भ्रष्टाचार को लेकर यहां के प्राचार्य आए दिन सोशल मीडिया और अखबारों की सुर्खियों बटोर रहे है। इसके बाद भी कोई नेता विधायक सांसद या मंत्री इनकी नकेल नहीं कस पा रहे हैं। योगी सरकार में डिप्टी सीएम के आदेश को ठेंगा देखाते हुए एक बार फिर मेडिकल कॉलेज सुलतानपुर पुनः चर्चा में आ गया। क्योंकि जिला अस्पताल में खुलेआम दलालों का बोल बाला है। जिसका उदाहरण है कि नेत्र विभाग के जूनियर रेजिडेंट चिकित्स्कों को कमीशन का लालच देकर मेडिकल कालेज में मनबढ़ दलाल अपनी कम्पनी की बाहरी दवा खिलवा रहा है। जिसका फोटो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वही सीनियर चिकित्स्कों को कानो कान खबर तक नहीं, मामले का खुलासा तब हुआ जब एक राम कुमार नाम का मरीज अपनी आँख की पीड़ा को दिखलाने के लिए राजकीय मेडिकल कालेज के नेत्र विभाग की ओपीडी मे गया। जहाँ पर पहले से मौजूद एक बिचौलिया जूनियर रेजिडेंट चिकित्सक के साथ एक प्राइवेट आदमी दिखाई पड़ा। जिसका सूत्रो से पता चला कि ब्लू शर्त पहने हुए इन जनाब का नाम अमित है, वो मरीजों को अपने आपको आँख का डॉक्टर भी बताता है। उसके कहने पर जे.आर. ने बाहर से महंगी दवाई लिखी और ले आकर दिखलाने को कहा, अंदर कि दवाई फायदा नहीं करती इसलिए बाहर कि दवाई लिखवा रहा हूँ, ये बात वहा मौजूद उक्त कथित मेडिकल दलाल तथाकथित डॉक्टर अमित ने मरीज से बाहर की दवा लेकर दिखलाने को कहा, सूत्र बताते है कि उक्त मनबढ़ दलाल की सेटिंग कॉलेज के प्राचार्य से होने की वजह से वो बगल के कमरे के चर्म रोग के चिकित्सक डॉक्टर वीर विक्रम से भी है, जो की उक्त दलाल की दवाई बाहर से धुँवाधार लिखते है। ऐसे में यह कहावत यहां चरितार्थ हो रही है कि जब सैया भये कोतवाल तो डर काहे का! पीड़ित मरीज राम कुमार का कहना है कि आज मैने अपनी आंख सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज में दिखाई। मुफ्त दवा के नाम पर फोटो में जो 05 टेबलेट दिख रही है यही इस सरकारी अस्पताल मिली है। बाकी दवाएं 327₹ की दवा बाहर से खरीदनी पड़ी, जो मेडिकल कॉलेज से लिखी गई थी, वो भी अन्य किसी मेडिकल स्टोर पर नहीं मिल पाई, केवल अस्पताल गेट के बगल स्थित मेडिकल स्टोर पर ही मिली है। सुलतानपुर मेडिकल कॉलेज में व्याप्त भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर जिले में कोई ऐसा जिम्मेदार नहीं है जो परेशान मरीजों और तीमारदारों की व्यथा को समझे और स्वास्थ्य विभाग के दोषियों पर कार्रवाई करवा कर स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के सुधार ला सकें।

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