कल्पना कीजिए एक ऐसी दुनिया, जहाँ अपराध का पैमाना यह ना हो कि क्या गलत है, बल्कि यह हो कि गलती करने वाला कितना ताकतवर है। जहाँ यौन हिंसा की शिकार लड़कियों की आवाज़ को दबाने के लिए अरबों डॉलर, जासूस और वकीलों की फ़ौज खड़ी कर दी जाए। यह कोई फिल्मी कहानी नहीं, बल्कि जेफ़री एपस्टीन नाम की उस दरिंदगी की असल ज़िन्दगी है, जिसके दस्तावेज़ आज 'एपस्टीन फ़ाइल्स' के नाम से दुनिया के सामने हैं।
एपस्टीन की ऐसी ही एक महत्वपूर्ण सहयोगी गिलेन मैक्सवेल को साल 2021 में नाबालिग लड़कियों को फुसलाने और उनका यौन शोषण कराने में सहयोग के इल्ज़ाम में मुजरिम ठहराया गया. लड़कियों के लिए मर्दाना ताक़त का कुचक्र अँधेरे कुएँ की तरह है. उन्हें फँसाया जाता है. वे फिर मानो किसी दलदल में फँसती चली जाती हैं.
यह महज़ कुछ कागज़ों का ढेर नहीं है। यह उस मर्दाना सत्ता तंत्र का आईना है, जो सदियों से चुपके-चुपके अपने जाल बुनता आ रहा है। एपस्टीन और उसकी सहयोगी गिलेन मैक्सवेल ने अमीरी, रसूख और राजनीतिक ताकत का इस्तेमाल कर एक ऐसा अंडरग्राउंड नेटवर्क खड़ा किया, जहाँ मासूम लड़कियां एक करेंसी की तरह इस्तेमाल की गईं।
ताकत का अंधेरा:
इन फ़ाइलों से जो नाम निकल कर आ रहे हैं, वे चौंकाने वाले हैं। राजकुमार से लेकर वैज्ञानिक तक, राष्ट्रपति से लेकर बिलियनेयर तक। लेकिन सबसे डरावना सवाल यह नहीं है कि "किस-किस ने वहाँ पार्टी की?", बल्कि यह है कि "आखिर इतने सालों तक यह सब कैसे चलता रहा?"
इसका जवाब है मर्दाना तंत्र की साजिश। यह वही तंत्र है जो पीड़िता से पूछता है, "तुम वहाँ गई क्यों?", "इतने सालों बाद ही क्यों बोल रही हो?" यह वही दुनिया है जो अपराधी को मौकों का शहंशाह बना देती है और पीड़िता को झूठी कहानी गढ़ने वाली औरसत औरत।
देरी से इंसाफ, देरी से आवाज़:
बीबीसी की इस रिपोर्ट में नासिरुद्दीन साहब ने बेहद सटीक बात कही है कि खुद के साथ हुई यौन हिंसा पर बोलना बहुत मुश्किल है, खासकर तब जब मुल्ज़िम ताकतवर हो। एपस्टीन की पीड़िताओं ने सालों इंतज़ार किया। उन्हें बदनाम किया गया। उन पर मुकद्दमे किए गए। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
यह बहादुरी ही है कि आज हम इन फ़ाइलों पर बात कर रहे हैं। यह बहादुरी ही है कि अब दुनिया यह मानने लगी है कि चुप्पी का मतलब रज़ामंदी नहीं होता।
सबक और सवाल:
एपस्टीन फ़ाइल्स सिर्फ एक खबर नहीं है, यह एक इंकलाब की चिंगारी है। यह हमें सिखाती है कि सबसे बड़ा अपराध सिर्फ हिंसा नहीं, बल्कि उसे छुपाने की साजिश भी है। यह हमें याद दिलाती है कि हर लड़की, हर औरत को यह अधिकार है कि वह बेखौफ होकर जी सके।
और हाँ, यह उन सभी मर्दों के लिए भी एक सवाल है जो चुप हैं आप किस तरफ हैं? ताकतवर दरिंदों के साथ, या उन हिम्मतवर औरतों के साथ जिन्होंने अंधेरे में चिराग जलाया?
निष्कर्ष:
पैसा और ताकत किसी को भी भगवान नहीं बना सकते, और न ही उन्हें कानून से ऊपर रख सकते हैं। एपस्टीन फ़ाइल्स ने एक बार फिर साबित किया है कि सच्चाई को दबाया जा सकता है, लेकिन मारा नहीं जा सकता। यह फ़ाइल हर उस शख्स के लिए सबक है जो सोचता है कि पैसे से सब खरीदा जा सकता है। नहीं, इंसाफ नहीं खरीदा जा सकता।
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