- लवकुश मिश्रा: मंदिर के दान-गिनती विभाग (कैलकुलेशन रूम) में काम करने वाले इस कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। इसने अयोध्या में 40 लाख रुपये का एक भूखंड खरीदा और उस पर मकान का निर्माण शुरू करवाया। छापेमारी के दौरान इसके घर से करीब 10 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है, जिसे अलमारी और गोबर के ढेर में छुपाकर रखा गया था।
- तिवारी (गर्भगृह कर्मी): राम मंदिर के गर्भगृह में तैनात इस कर्मी के पास भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी थी। इसने कुछ महीने पहले अयोध्या में 1.5 करोड़ रुपये की महंगी जमीन खरीदी थी।
- SIT का गठन: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
- व्यापक जांच: दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर के 50 से अधिक कर्मचारी इस समय जांच के दायरे में हैं। अब तक अलग-अलग संदिग्धों से करीब 2 करोड़ रुपये की नकदी बरामद की जा चुकी है।
- CBI जांच की मांग: इस कथित घोटाले को लेकर विपक्ष (समाजवादी पार्टी) और भाजपा के कुछ स्थानीय नेताओं ने मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी CBI जांच तथा CAG ऑडिट कराने की मांग उठाई है।
अयोध्या। श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी का मामला अब सिर्फ दान पेटिकाओं और नकदी की गिनती तक सीमित नहीं रह गया है। अब इस मामले में महंगी जमीन खरीदने और मकान निर्माण तक के गंभीर आरोप सामने आए हैं। ताजा जानकारी के मुताबिक, मंदिर के चढ़ावे की धनराशि में कथित गड़बड़ी के मामले में दो और ट्रस्ट कर्मियों को पूछताछ के लिए पकड़ा गया है।
सूत्रों के अनुसार, इनमें एक करीबी ऐसा है, जिसने हाल ही में करीब डेढ़ करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है। वहीं दूसरे कर्मचारी पर आरोप है कि उसने करीब 40 लाख रुपये का भूखंड खरीदकर उस पर मकान निर्माण शुरू कराया। जांच एजेंसियां अब इस बात की पड़ताल कर रही हैं कि 18 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले कर्मचारी इतनी महंगी संपत्ति के मालिक कैसे बन गए।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रस्ट कर्मी लवकुश को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। उसके घर से कुछ नकदी मिलने की बात भी सामने आई है। वहीं मंदिर के गर्भगृह में तैनात सेवारत तिवारी से भी पूछताछ की जा रही है। बताया जा रहा है कि उसने कुछ महीने पहले ही अयोध्या में महंगी जमीन खरीदी थी।
इस पूरे मामले में एक और गंभीर बात सामने आई है। खबर के मुताबिक, गणना कक्ष में CCTV कैमरे लगाने का विरोध ट्रस्ट के ही एक पदाधिकारी ने किया था। अब सवाल उठ रहा है कि जब दान पेटिकाओं की गिनती और चढ़ावे का हिसाब मंदिर की सबसे संवेदनशील व्यवस्था का हिस्सा है, तो CCTV व्यवस्था का विरोध किसके इशारे पर हुआ और क्यों हुआ?
अब तक पकड़े गए अधिकारी और कर्मचारी एक ही शिफ्ट में दानराशि की गिनती करते थे। इसी वजह से जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि कहीं यह पूरा खेल एक संगठित गिरोह की तरह तो नहीं चल रहा था। मिल्कीपुर निवासी अनुकूल मिश्रा को इस समूह का नेतृत्वकर्ता माना जा रहा है। उस पर भागवत कथा, शादी समारोहों में वैभव प्रदर्शन और साड़ियों के वितरण जैसे आरोप भी लगे हैं।
इस बीच चढ़ावा चोरी मामले में CBI जांच की मांग को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में जनहित याचिका दाखिल की गई है। याचिका में पूरे प्रकरण की CBI जांच और CAG से ऑडिट कराने की मांग की गई है। मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार, CBI, CAG और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को पक्षकार बनाया गया है।
सबसे बड़ा सवाल अब भी वही है करोड़ों के चढ़ावे, महंगी संपत्तियों और गंभीर आरोपों के बावजूद अब तक FIR नहीं श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में सिर्फ पूछताछ और बैठकों से आगे बढ़कर आपराधिक जांच होगी या नहीं, अब सबकी निगाह इसी पर है।
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