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विभागीय अधिकारियों की मिली भगत से फल फूल रहे हैं प्राइवेट स्कूल

बिना मान्यता के चल रहे निजी विद्यालय, नहीं हो रही कार्रवाई

प्राइवेट स्कूल वालों की मनमानी मान्यता प्रायमरी, अपर प्राइमरी का कक्षाएं संचालित हो रहे हैं 9 से 12 तक 


अम्बेडकर नगर: जनपद में शिक्षा के अधिकार अधिनियम एवं विभागीय नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए बड़े पैमाने पर निजी विद्यालयों का संचालन किया जा रहा है। विभागीय लापरवाही एवं उपेक्षित रवैया के कारण बिना मान्यता के प्राइवेट स्कूल चल रहे हैं।

शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों की लचर  व्यवस्था एवं लापरवाही की वजह से प्राइवेट स्कूलों की मनमानी चरम सीमा पर चल रही जैसे अकबरपुर , जलालपुर, जहांगीरगंज , राजेसुल्तानपुर, बसखारी ,रामनगर, टांडा, सभी खंड शिक्षा अधिकारियों एवं उच्च अधिकारियों की मिली भगत प्राइवेट स्कूल की मान्यता प्राइमरी का लेकर आठ तक चला रहे हैं कई स्कूल संचालकों ने तो आठवीं की मान्यता होने के बाद भी 9वीं से 12वीं तक की कक्षाएं संचालित कर रखी है। इसके अलावा भी क्षेत्र से बाहर सीबीएसई मान्यता प्राप्त विद्यालय क्षेत्र के कई अमान्यता प्राप्त विद्यालय के वर्ग 9 के बच्चों का विद्यालय में पंजीकृत कर उन्हें सीबीएसई परीक्षा में दिलवा रही है। वहीं विभाग के पास क्षेत्र में गलत तरीके से संचालित शिक्षण संस्थाओं की न तो सूची है और न ही ऐसे स्कूलों के खिलाफ कोई कार्यवाही की जा रही है। 

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बात यही नहीं थम रही है जिसकी मान्यता हिंदी मीडियम से है वह भी इंग्लिश मीडियम बोर्ड पर लिखा बच्चों के माता-पिता को गुमराह कर रहे गुमराह करने का नया तरीका बताएं बनाया कुछ दिन पहले सोशल मीडिया पर खबर चलने के बाद  मीडिया कर्मी से  स्कूल वालों से बात हुई तो उन्होंने बताया मेरा इंग्लिश मीडियम से मान्यता है लेकिन बाद में यह भी कहा जा रहा है हमारी मान्यता यूपी बोर्ड से सवाल यह है अगर यूपी बोर्ड की मान्यता है तो बोर्ड पर क्यों नहीं दर्शाया जा रहा है। अगर देखा जाए जिले में  बहुत से ऐसे स्कूल चल रहे हैं।इस संबंध में अपना नाम न छापने के शर्त पर सीबीएसई से मान्यता प्राप्त एक निजी विद्यालय के संचालक बताते हैं कि भले ही सरकार बुनियादी शिक्षा में गुणात्मक सुधार के लिए कई दावे कर रही हो, लेकिन  जनपद अम्बेडकरनगर  क्षेत्र में बिना मान्यता वाली शिक्षा की दुकानें फल-फूल रही हैं। शिक्षा विभाग मानक विहीन विद्यालयों पर शिकंजा कसने में अभी तक विफल हैं। खास बात यह है कि अधिकांश स्कूल आठवीं की मान्यता की आड़ में हाईस्कूल व इंटरमीडिएट की कक्षाएं चला रहे हैं। वे बताते हैं कि मानक के अनुरूप विद्यालयों का संचालन हो रहा है कि नहीं, इसके जांच के लिए विभाग के अधिकारी झांकने तक नहीं जाते हैं। जानकारी के अभाव में बच्चों व उनके अभिभावक गुमराह होने के लिए विवश हैं। खाली कागजों में शायद जिम्मेदार अधिकारी अगर कभी जांच भी करते हैं तो जांच भी फाइलों में दब कर रह जाती है कार्रवाई के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति की जाती प्राइवेट स्कूल के प्रधानाचार्य और जिम्मेदार अधिकारियों के शिकार हो रहे हैं बच्चों के  माता-पिता बच्चों को तो इंग्लिश मीडियम समझ के पढ़ रहे हैं लेकिन जब स्कूल से निकल कर ब सी.बी.एस.सी बोर्ड में  एडमिशन  लेने की बात आती है तो वहीं यूपी बोर्ड की मान्यता का टीसी बना कर दे तब समझ पाते बच्चों के माता-पिता लेकिन माता-पिता माता-पिता बच्चों के भविष्य के लिए इतना रुपया खर्च करके इंग्लिश मीडियम से पढ़ने की सोची थी लेकिन सब मंसूबे पर पानी फिर जाता  हैं कहीं ना कहीं यह जिम्मेदार अधिकारियों की अनदेखी से ऐसा हो रहा है में रोड पर बोर्ड लगे हुए हैं इंग्लिश मीडियम का उसे पर यह नहीं दर्शाया गया है की मान्यता यूपी बोर्ड का आप समझ सकते हैं की स्कूल चलाने के लिए यह सब तरकीब लगाएंगे हुए हैं। इंग्लिश मीडियम के नाम पर फीस भी दो गुना लिया जाता है बच्चे के माता-पिता की जेब खाली कर रहे हैं स्कूल से ही ड्रेस कापी किताब दिए जाते हैं जो की ऐसी किताबें छपवाते हैं कि वह सिर्फ इन्हीं के स्कूल मिलते हैं । बड़े मजे की बात तो यह भी है की सुविधा के नाम पर भी शुल्क वासुले ले जाते हैं जैसे स्कूल के कमरे में पंखे लगे होना जनरेटर व्यवस्था रखना स्कूल का मेंटेनेंस खर्च जोड़कर बच्चों के माता-पिता से  वसूली की जाती है। प्राइवेट स्कूल वालों ने ऐसा जाल बना है की शिक्षा को व्यवसाय बना कर रख दिया गया ‌ आखिर ऐसे प्राइवेट स्कूल  वालों शिकंजा कसा जाएगा या नहीं मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी जी शिक्षा बेहतर बनाने के लिए भले ही लाख वादे कर रहे हैं लेकिन सरकार की छवि धूमिल करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जा रहा है

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