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साल 2023: कुख्यात माफिया अतीक का अंत,दुजाना मिला मिट्टी में,2023 में यूपी में देवरिया कांड समेत हुई ये बड़ी वारदात...

साल 2023 लगभग बीत चुका है।उत्तर प्रदेश में पूरे साल कई ऐसे बड़े आपराधिक मामले सुर्खियों में छाए रहे,जो झकझोर कर रख दिया।कहीं पर पुलिस ने एनकाउंटर किया तो कहीं पर अपनों ने ही परिवार को मौत के घाट उतार दिया। कुछ मामलों ने प्रदेश को झकझोरकर रख दिया।आइए जानें पांच ऐसे मामलों के बारे में।

माफिया ब्रदर्स अतीक और अशरफ की हत्या

प्रयागराज पुलिस कस्टडी में तीन शूटरों ने अतीक और अशरफ की गोली मारकर हत्या कर दी. जिस पर पुलिस और सरकार पर भी सवाल उठाए गए. प्रयागराज पुलिस कस्टडी में तीन शूटर्स ने अतीक और उसके भाई अशरफ अहमद की गोली मारकर हत्या कर दी थी और पुलिस के आगे खुद को सरेंडर कर दिया. इस मामले को लेकर विपक्ष ने जोरदार हंगामा किया था.15 अप्रैल रात साढ़े दस बजे कुख्यात माफिया अतीक अहमद और उसके भाई माफिया अशरफ की पुलिस कस्टडी में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।अतीक और अशरफ को उस समय गोली मारी गई जब दोनों मेडिकल जांच के लिए अस्पताल लाया गए थे। मीडियाकर्मी बनकर आए तीन हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं।माफिया अतीक अहमद को इसी साल 28 मार्च को उमेश पाल अपहरण कांड में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। अतीक के साथ दो अन्य दिनेश पासी और सौलत हनीफ को भी उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी।अतीक के भाई अशरफ समेत सात आरोपी दोष मुक्त करार दिए गए थे। एक बार सांसद, पांच बार विधायक रहे अतीक पर 44 साल पहले पहला मुकदमा दर्ज हुआ था। तब से अब तक अतीक के ऊपर 100 से अधिक मामले दर्ज हुए, लेकिन पहली बार किसी मुकदमे में उसे दोषी ठहराया गया था।

देवरिया कांड से कांप उठे थे लोग

देवरिया जिले में रुद्रपुर कोतवाली क्षेत्र के फतेहपुर गांव में दो अक्तूबर को सुबह छह बजे जमीन के विवाद में एक पूर्व जिला पंचायत सदस्य की धारदार हथियार से काटकर हत्या कर दी गई थी। इससे गुस्साए पूर्व जिला पंचायत सदस्य के पक्ष के लोग दूसरे पक्ष के घर में घुसकर पति, पत्नी और उसकी तीन संतानों को गोली मारकर और धारदार हथियार से प्रहार कर हत्या कर दी थी, जबकि एक बेटा गंभीर रूप से घायल हो गया था, जिसे मरा हुआ समझकर हत्यारोपियों ने छोड़ दिया था। इस घटना में छह लोगों की हत्या हुई थी।इस घटना से प्रदेश की सियासत में हलचल पैदा हो गई थी। घटना में दो दर्जन से अधिक लोगों पर नामजद एफआईआर हुई और उनकी गिरफ्तारी भी हुई।

वेस्ट यूपी में खौफ का पर्याय बना था अनिल दुजाना

पश्चिमी उत्तर प्रदेश का कुख्यात अनिल दुजाना चार मई को एसटीएफ से हुई मुठभेड़ में मारा गया था। एसटीएफ और गौतमबुद्धनगर पुलिस को उसकी तलाश थी। कुख्यात अनिल दुजाना पश्चिमी यूपी में खौफ का पर्याय बना हुआ था। अनिल दुजाना पर लूट, हत्या, डकैती समेत 65 मुकदमे दर्ज थे। मेरठ में एसटीएफ के एसपी बृजेश सिंह के नेतृत्व में टीम ने अनिल दुजाना को गंगनहर पर भोला की झाल पर चार मई को घेर लिया था। अनिल दुजाना ने एसटीएफ की टीम पर गोली चला दी, जवाबी फायरिंग में मारा गया। कुख्यात अनिल दुजाना वारदातों में प्रतिबंधित बोर के हथियारों का इस्तेमाल करता था। जब अनिल दुजाना जेल से बाहर था तो उसके गैंग के पास एके 47 और .30 बोर, नाइन एमए जैसे प्रतिबंधित बोर वाले हथियार थे। अनिल दुजाना दोनों हाथों से पिस्टल चलाता था। पिछले कुछ वर्षों में अनिल दुजाना ने सहारनपुर से नोएडा और इटावा से लेकर अयोध्या तक अपना गिरोह फैला लिया था। अधिकतर जिलों में अनिल दुजाना के गिरोह के सदस्य बन गए थे। अनिल दुजाना यूपी का बड़ा डॉन बनना चाहता था। इसी मकसद के साथ बहुत तेजी से अपने गिरोह को बढ़ा रहा था। अनिल दुजाना जिस क्षेत्र में जाता वहां पर सक्रिय गिरोह के साथ हाथ मिलाता था और नए युवाओं को गिरोह में जोड़ लेता था।

साल 2002 में दर्ज हुआ पहला मामला

दुजाना गांव के कुख्यात गैंगस्टर अनिल दुजाना पर पहला मामला साल 2002 में गाजियाबाद के कवि नगर में दर्ज हुआ था. इस मामले में उस पर हरबीर पहलवान नाम के व्यक्ति की हत्या का आरोप था. अनिल दुजाना पर 18 केस हत्या के हैं और बाकी लूटपाट, रंगदारी, जमीन कब्ज़ा और आर्म्स एक्ट से जुड़े मामले हैं.

लखनऊ कोर्ट में संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या

लखनऊ के एससीएसटी कोर्ट रूम में 7 जून को माफिया मुख्तार अंसारी के बेहद करीबी कुख्यात अपराधी 50 वर्षीय संजीव महेश्वरी उर्फ जीवा की हत्या कर दी गई थी। वकील बनकर आए हमलावर ने कोर्ट रूम में ही रिवॉल्वर से ताबड़तोड़ फायरिंग की। इस दौरान दो पुलिसकर्मियों, एक डेढ़ साल की बच्ची और उसकी मां को भी गोली लगी। जीवा पर हमलावर ने पीछे से फायरिंग की। वारदात के बाद वकीलों ने दौड़ाकर हमलावर को पकड़ लिया लिया और पीटकर पुलिस के हवाले कर दिया। मुजफ्फरनगर का संजीव उर्फ जीवा ने साल 1991 में मुजफ्फनगर में पहला अपराध किया था। तब उसके खिलाफ कोतवाली नगर में मारपीट का केस दर्ज किया गया था। उस केस में संजीव जीवा दोषमुक्त भी हो चुका था। साल 1991 में किए गए पहले अपराध के बाद संजीव जीवा ने अपराध की दुनिया में एक कदम रखा कि फिर अपराध के दलदल में डूबता चला गया। पुलिस रिकार्ड बताते हैं कि संजीव जीवा के खिलाफ मुजफ्फरनगर में 17, उत्तराखंड में 5, गाजीपुर में एक, फर्रूखाबाद में एक और लखनऊ में एक कुल 25 मामले दर्ज थे। 


इटावा में दो सगी बहनों को बड़ी बहन ने मार डाला



 इटावा जिले में अक्तूबर महीने में बलरई थाना क्षेत्र के बहादुर गांव में दो मासूम बहनों की घर में घुसकर धारदार हथियार से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। दो सगी बहनों की हत्या के मामले में बड़ी बहन को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। साथ ही आरोपी बहन के पास से कत्ल में इस्तेमाल फावड़ा भी बरामद कर लिया गया था। इस नृशंस हत्याकांड में बड़ी बहन ने घटना को अंजाम देने की बात कबूल की थी। मामले में एसएसपी संजय कुमार वर्मा ने बताया था कि बहादुरपुर गांव निवासी जयवीर पाल की दो बेटियां शिल्पी (7) और रोशनी (5) की आठ अक्तूबर को फावड़े से गला काटकर हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने पिता की तहरीर पर दोनों बेटियों की हत्या करने में बड़ी बेटी अंजली के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था। अंजली को पुलिस ने गिरफ्तार करके पूछताछ की थी। इसमें पुलिस को प्रेमी के कहने पर हत्या के लिए उकसाने की बात सामने आई थी।

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