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...तो मेनका गांधी फिर लड़ेंगी लोकसभा चुनाव

मेनका गांधी को हटाने के लिए 40 परसेंट वाले कुछ माननीय कुबेर की कोठरी के सहारे मार रहे हैं हाथ पांव

जिले के एक बाहुबली लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए सत्ता और विपक्षी दलों में कर रहे है लगातार कोशिश

जिले की आमजनता फिर सांसद मेनका गांधी को बनाना चाहती है सांसद

सुलतानपुर।अगर उम्र की सीमा पीएम मोदी और उनके नवरत्नों पर फिट बैठती है तो यकीन कीजिए कि 38 सुलतानपुर लोकसभा क्षेत्र से फिर मौजूदा सांसद संजय मेनका गांधी वर्ष 2024 का लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी से लड़ेंगी। इसके लिए उन्हें शीर्ष स्तर से कोई कवायद नही करनी है। हां निचले स्तर पर जरूर कुछ भाजपा व सहयोगी दलों  नेता चुनाव लड़ने के लिए हाथ पांव मार रहे हैं। लेकिन वह इस बात को बखूबी जानते हैं कि सांसद मेनका गांधी की सक्रियता के कारण उनकी दाल नही गलेगी। इस लिए जनता के बीच उनकी उम्र सीमा को लेकर भ्रम फैला रहे हैं। क्योंकि मेनका गांधी का बड़ा राजनीतिक चेहरा होने के कारण और उनकी लगातार क्षेत्र में सक्रियता के कारण सियासी लोगों के पास कोई और बहाना नही है। ऐसे लोगों के पास अपना कोई जनाधार तो है नही,बस भाजपा के वोट बैंक के भरोसे दिल्ली की कुर्सी पर बैठना चाहते हैं। जिले के कुछ भाजपा के  कद्दावर नेता हैं जिनकी पकड़  सीधे आलाकमान तक है, लेकिन वह किसी तरह का प्रपंच नहीं कर रहे हैं। हो सकता है कि पार्टी के सामने कोई विशेष परिस्थिति आई तो ऐसे ही कद्दावर नेताओं के नाम पर पार्टी विचार कर सकती है।हालांकि इसकी सम्भावना बहुत कम है।

संसद मेनका गांधी पर जिले की जनता को गर्व

जिले की जनता को सांसद मेनका गांधी पर गर्व है कि वह ऐसे निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। उन्होंने अपने पांच वर्ष के कार्यकाल में जनपद को विकास की अग्रणी श्रेणी में लाकर खड़ा कर दिया है। सासंद को लेकर जनता में न कोई कन्फ्यूजन है और न ही कोई गुस्सा व आक्रोश है। क्योंकि उन्होंने कभी लोगों को आपस में लड़ाने का कार्य नही किया है। सांसद मेनका गांधी की धमक सत्ता और नौकरशाही में भी है। अच्छे कार्य करने वाले अफसरों की वाहवाही और नकारा अफशरों को खरी खोटी सुनाने से वह कतई नही हिचकिचाती हैं। आजादी के बाद की पहली सांसद हैं जो दिल्ली में रहकर जिले के विकास के लिए सोचती रहती हैं। साथ ही जिले का बराबर दौरा करती रहती हैं। उन्होंने अपने बेटे पीलीभीत के सांसद वरुण गांधी की ओर से लगातार बयानबाजी को नजरंदाज कर खुद पार्टी लाइन पर हमेशा कार्य किया है।और उसी पैटर्न पर चल भी रही हैं। कुछ सियासी लोग सांसद वरुण गांधी को लेकर मेनका गांधी के राजनीतिक भविष्य का आकलन कर रहे हैं। लेकिन शायद यह भूल रहे हैं कि उनकी कांग्रेस विरोधी कार्यशैली रही है। यही भाजपा आलाकमान को सूट भी करता है और पसन्द भी है।

मेनका गांधी चुनाव लड़ी तो फिर इंडिया गठबंधन होगा धड़ाम

सांसद मेनका गांधी के फिर से भाजपा से 38 सुलतानपुर लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने को लेकर विपक्षी   इंडिया गठबंधन भी ससंकित है। इस गठबंधन की सबसे बड़ी चिंता है कि मेनका गांधी के चुनाव लड़ने से सफलता प्राप्त करना बहुत मुश्किल है।  अगर किन्हीं कारणों से मेनका गांधी चुनाव नहीं लड़ी तो इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी को हराना भाजपा के लिए फिलहाल इस जिले में तो मुश्किल है। ऐसे में भाजपा भी अपनी इस सीट को गवांने का जोखिम इस लिए उठाना नही चाहेगी की उसकी एक सीट कम हो। शीर्ष स्तर पर मेनका गांधी की कोई अनबन भी नहीं है जो उनको नजरंदाज किया जाए। फिलहाल मेनका गांधी को नजरंदाज भाजपा देश स्तर पर नही बहस में नहीं पड़ना चाहती है।

40 परसेंट कमीशन वाले कुछ माननीय मार रहे हैं हाथ पांव:

कुछ 40 परसेंट वाले माननीय 38 लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए हाथ पांव मार रहे हैं। ऐसे लोगों को लगता है कि चरण चुम्बन कर और कुबेर की कोठरी के सहारे भाजपा अथवा सहयोगी दलों के नेताओं को पूजकर बड़ी कुर्सी हासिल कर लेंगे। यह प्रयोग असेम्बली में कई जगहों पर हुआ भी है। सत्तापक्ष के कई माननीय और नेता इस गोटी को सेट करने में लगे हैं। चर्चा तो यहां तक है कि भाजपा के कई नेता मेनका गांधी को हटाने के लिए सहयोगी दलों के आलाकमान पर दबाव बना कर यह सीट अपने खाते में करने की माथापच्ची में लगे हैं। उनकी यह कोशिश कामयाब होती है कि नही यह तो भविष्य के गर्त में है। जिले के एक बाहुबली नेता भी भाजपा से टिकट हासिल करने के लिए लगे हैं। इसके अलावा बसपा की लक्ष्मी कुबेर पूजन की परिपाटी को अपनाते हुए निषाद पार्टी,अपनादल अनुप्रिया गुट के माध्यम से टिकट लेने की होड़ में लगे हैं। अगर उनकी सेटिंग नही हुई तो फिर इंडिया गठबंधन के प्रमुख घटक समाजवादी पार्टी से लड़ने की कोशिश करेंगे। अगर यह सीट कांग्रेस के खाते में गई तो इससे भी सेटिंग करने में पीछे नही रहेंगे। बसपा से सेटिंग का तो पुराना हुनर पहले से ही विद्यमान है।

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