Skip to main content

कागज़ की किताबें या “सोने-चांदी” का कारोबार ? शिक्षा माफियाओं की मनमानी पर सवाल

अभिभावकों की जेब पर बढ़ता बोझ, निजी स्कूलों, प्रकाशकों की सांठगांठ पर उठे गंभीर प्रश्न


सुल्तानपुर

      जिले में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली पाठ्यपुस्तकों की कीमतों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आम धारणा बनती जा रही है कि कागज़ से छपने वाली इन किताबों के दाम ऐसे वसूले जा रहे हैं, मानो वे “सोने-चांदी” से तैयार की गई हों।

स्थानीय स्तर पर कई अभिभावकों का कहना है कि हर साल नए सत्र में स्कूलों द्वारा निर्धारित की गई किताबें केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं, जहां उनकी कीमत बाजार दर से कहीं अधिक होती है। इससे यह संदेह गहराता है कि स्कूल प्रबंधन और प्रकाशकों के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली मोटी किताब छापने की वास्तविक लागत इतनी अधिक नहीं होती,जितनी कीमतपाठ्य पुस्तकों की कीमत छात्रों से वसूली जाती है। इसके बावजूद, अभिभावकों को मजबूरन वही किताबें खरीदनी पड़ती हैं, क्योंकि स्कूलों में अन्य विकल्प स्वीकार नहीं किए जाते।

शिक्षा माफियाओं का जाल?

समीक्षात्मक दृष्टि से देखें तो यह पूरा तंत्र एक “शिक्षा माफिया” के रूप में उभरता दिख रहा है, जहां—

स्कूल अपनी पसंद की किताबें थोपते हैं

प्रकाशक ऊंचे दाम तय करते हैं

बुक सेलर सीमित वितरण के जरिए कीमत नियंत्रित रखते हैं

इस चक्र में सबसे ज्यादा प्रभावित मध्यम और गरीब वर्ग के अभिभावक होते हैं, जिनके लिए बच्चों की पढ़ाई एक आर्थिक बोझ बनती जा रही है।

प्रशासन और मीडिया की भूमिका पर सवाल

यह भी एक महत्वपूर्ण पहलू है कि इतनी बड़ी समस्या के बावजूद, छात्रों और अभिभावकों की इस गंभीर समस्या पर  ठोस कार्रवाई क्यों नहीं होती ?...सांसद ,विधायक ,सदन में ऐसे गंभीर विषय को क्यों नहीं उठाते ?...या व्यापक मीडिया बहस भी इस विषय पर कम ही देखने को मिलती है। अब सवाल उठता है कि क्या इस “खुली लूट” पर निगरानी के लिए बनाई गईं जिम्मेदार संस्थाएं अपनी भूमिका सही से निभा रही हैं? यदि नहीं तो क्यों ?..क्या सरकार ऐसे मसलों से इसलिए दरकिनार रखती जैकी कहीं शिक्षा माफियाओं की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है?... 

क्या हो समाधान?

एनसीईआरटी/सरकारी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए

निजी स्कूलों की किताबों की सूची पर नियामक नियंत्रण हो

एक ही किताब को बार-बार बदलने की प्रवृत्ति पर रोक लगे

ऑनलाइन और ओपन-सोर्स सामग्री को बढ़ावा दिया जाए।

          शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान देना है, न कि मुनाफा कमाना। यदि समय रहते इस पर  सरकारों द्वारा नियंत्रण नहीं किया गया, तो “महंगी शिक्षा” समाज में असमानता को और गहरा कर सकती है। जिससे सरकार की ,निष्पक्ष शिक्षानीति" पर बड़ा सवाल बन रहा है। अब जरूरत है सख्त नीति और पारदर्शिता की, ताकि शिक्षा व्यवस्था पर से “माफिया” का साया हटाया जा सके।और हर वर्ग के आर्थिक कमजोर वर्ग भी अपने बच्चों को स्वतंत्रशिक्षा  ग्रहण करवा सकें ।


देश राज्य की खबरों को सबसे पहले पढ़ने के लिए सर्च करे lmdndigital न्यूज़ चैनल...

Comments

Popular posts from this blog

लापता वकील अर्चना तिवारी का कांस्टेबल से क्या था कनेक्शन? सिर्फ टिकट बुकिंग तक बातचीत या

मध्य प्रदेश से 12 दिनों से लापता वकील अर्चना तिवारी को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी से बरामद किया गया। मामले की जांच की जा रही है। 12 दिनों से लापता वकील अर्चना तिवारी को बरामद कर लिया गया है। वह मध्य प्रदेश से लापता हो गईं थी। उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में भारत-नेपाल सीमा के पास से उनको बरामद किया गया है। लखीमपुर खीरी में मिली अर्चना तिवारी पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, मंगलवार देर रात अर्चना तिवारी को बरामद किया गया। भोपाल राजकीय रेलवे पुलिस (GRP) के SP राहुल कुमार लोढ़ा ने एक वीडियो मैसेज के जरिए उनकी बरामदगी की पुष्टि की। जीआरपी की एक टीम ने उन्हें लखीमपुर खीरी में रिसीव किया है और उन्हें बुधवार को भोपाल लाया जाएगा। लोढ़ा ने कहा, "7 अगस्त से लापता अर्चना तिवारी को उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी में बरामद कर लिया गया है। भोपाल लाए जाने के बाद, हम उनसे पूछताछ करेंगे और फिर आगे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।" कटनी ट्रेन में यात्रा करते समय हुईं थी लापता कटनी निवासी अर्चना तिवारी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ में वकील के रूप में प्रैक्टिस कर रही थीं। साथ ही सिविल जज परीक...

GST हो गया कम, अब दिवाली-छठ पर झूम जाएगा मन, जानिए क्या-क्या होगा सस्ता...

New  GST  Rate: सितंबर 2025 की बैठक में बड़े बदलाव किए गए। अब सभी तरह की ब्रेड (पराठा, रोटी, खाखरा, पिज्जा ब्रेड) पर  जीएसटी  पूरी तरह  खत्म  कर दिया गया है। कपड़े और फुटवियर 2500 रुपये तक  सस्ते  होंगे, इन पर 5% टैक्स लगेगा। हेल्थ व लाइफ इंश्योरेंस (5 लाख तक) और कुछ रोज़मर्रा की चीज़ों पर भी राहत मिली। त्योहारों से पहले मोदी सरकार ने आम आदमी को बड़ी राहत दी है. दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ पर इस बार मन झूम उठेगा. सरकार ने जीएसटी अब कम कर दिए हैं. जीएसटी स्लैब में बदलाव से आम दिन चर्या की बहुत सी चीजें सस्ती हो जाएंगी. नई दिल्ली: बुधवार को जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक हुई. इस बैठक में ही कई अहम प्रस्तावों पर मुहर लगी. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के मुताबिक, अब सिर्फ दो जीएसटी स्लैब 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत होंगे. अब जीएसटी स्लैब 12 प्रतिशत और 28 प्रतिशत को समाप्त कर दिया गया है. इन स्लैब में अधिकांश जरूरी चीजें शामिल हैं. विलासिता और हानिकारक वस्तुओं के लिए एक अलग स्लैब होगा, जो 40 प्रतिशत है. पूरे देश में जीएसटी में बदलाव का फैसला 22 सितंबर से लागू ...

आज के लैला मजनू.. प्यार की जंग में पार किया भारत-पाक बॉर्डर, जानें इस पाकिस्तानी जोड़े की कहानी...

लैला मजनू.. हीर रांझा.., ये वो जमाना था, जब लोग अपने प्यार के लिए मौत को गले लगा लेते थे. अब ऐसा जमाना आ गया है, जहां प्यार पाने के लिए परिवार और समाज के खिलाफ जाकर बॉर्डर पार कर दे रहे हैं.  इसका एक उदाहरण तो हमारे सामने है, सीमा हैदर, जिसने सचिन के लिए अपने देश पाकिस्तान और परिवार को छोड़कर भारत आ गई. अब ऐसा ही और मामला सामने आ रहा है, जहां अपने प्यार को मुकम्मल करने के लिए फिर से एक पाकिस्तानी जोड़े ने भारत-पाकिस्तान का बॉर्डन पार कर दिया. प्यार के लिए अपने देश, परिवार को छोड़कर भारत आई सीमा की कहानी से ये मामला थोड़ा अलग है. यहां दोनों ही पाकिस्तानी है और अपने प्यार के लिए घर से भागकर भारत आ गए. लेकिन यहां चौंकाने वाली चीज इनकी उम्र है, इनकी उम्र इतनी कम है कि आपको एक बार फिर अपना बचपन का प्यार याद आ जाएगा. . . पाकिस्तानी जोड़े को गुजरात के कच्छ से पकड़ा गया. कच्छ के वगाड इलाके के खादिर आइलैंड के रतनापुर गांव के जंगलों में दोनों घूम रहे थे. अजनबी जोड़े को देखकर गांव वालों ने पूछताछ की, दोनों ने खुद को पाकिस्तानी बाताया. बातचीत में पता चला, कि लड़के की उम्र 16 साल है और लड़की 14...