Skip to main content

राशनकार्ड धारकों के लिए नया नियम हुआ जारी, अब प्रत्येक यूनिट वालों को लगाना होगा अंगूठा

आपूर्ति विभाग ने राशन कार्डों के यूनिटों के सत्यापन का नया तरीका अपनाया है। विभाग ने यूनिटों की ई-केवाईसी कराने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत कार्ड के प्रत्येक यूनिट को एक बार ई-पास मशीन में अंगूठा लगाना पड़ेगा। इसका समय विभाग की ओर से निर्धारित किया जाएगा। राशन कार्ड धारकों का कोई भी एक यूनिट ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाकर राशन प्राप्त कर सकता है।

यूपी में राशन कार्ड धारकों का कोई भी एक यूनिट ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाकर राशन प्राप्त कर सकता है। पिछले कई वर्षों से यह व्यवस्था चल रही है। ऐसे में जिस व्यक्ति का निधन भी हो गया है, उसका भी खाद्यान्न उठ रहा है। जबकि इसकी सूचना दी जानी चाहिए, जिससे कार्ड से ऐसे यूनिट को हटाया जा सके।

विभाग ने लिया ई-केवाईसी कराने का निर्णय

आपूर्ति विभाग ने इस तरह के यूनिट को राशन कार्ड से हटाने के लिए ई-केवाईसी कराने का निर्णय लिया है। यह व्यवस्था फरवरी माह से शुरू हो जाएगी। इसमें सभी यूनिटों को क्रम वार अलग-अलग महीनों में ई-पाश मशीन में अंगूठा लगाने का मौका दिया जाएगा। इस व्यवस्था से ऐसे यूनिट का पता चल जाएगा, जिनका निधन हो चुका है।इसे लेकर आपूर्ति विभाग प्लानिंग कर रहा है।विभाग यूनिटों की सुविधा के मुताबिक समय निर्धारित करना चाहता है, जिससे गैर जनपद व गैर राज्यों में काम करने गए लोगों को भी असुविधा न हो।बढ़ती जा रहे नए कार्ड बनवाने के आवेदन. पात्र गृहस्थी और अंत्योदय योजना वर्ष 2011 की जनगणना के मुताबिक संचालित हो रही है। उस समय जिले की आबादी 44 लाख के करीब थी। अब आबादी बढ़कर लगभग 53 लाख हो गई। परिवारों की भी संख्या बढ़ गई है। उधर, सत्यापन न होने के चलते रिक्त स्थान कम ही बन पाया है। फिलहाल जिले का लक्ष्य पूरा चल रहा है। नए कार्ड नहीं बन पा रहे हैं।

Comments

Popular posts from this blog

कागज़ की किताबें या “सोने-चांदी” का कारोबार ? शिक्षा माफियाओं की मनमानी पर सवाल

अभिभावकों की जेब पर बढ़ता बोझ, निजी स्कूलों, प्रकाशकों की सांठगांठ पर उठे गंभीर प्रश्न सुल्तानपुर       जिले में शिक्षा के बढ़ते व्यवसायीकरण को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। स्कूलों में इस्तेमाल होने वाली पाठ्यपुस्तकों की कीमतों को लेकर अभिभावकों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। आम धारणा बनती जा रही है कि कागज़ से छपने वाली इन किताबों के दाम ऐसे वसूले जा रहे हैं, मानो वे “सोने-चांदी” से तैयार की गई हों। स्थानीय स्तर पर कई अभिभावकों का कहना है कि हर साल नए सत्र में स्कूलों द्वारा निर्धारित की गई किताबें केवल चुनिंदा दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं, जहां उनकी कीमत बाजार दर से कहीं अधिक होती है। इससे यह संदेह गहराता है कि स्कूल प्रबंधन और प्रकाशकों के बीच किसी प्रकार की मिलीभगत है। विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी गुणवत्ता वाली मोटी किताब छापने की वास्तविक लागत इतनी अधिक नहीं होती,जितनी कीमतपाठ्य पुस्तकों की कीमत छात्रों से वसूली जाती है। इसके बावजूद, अभिभावकों को मजबूरन वही किताबें खरीदनी पड़ती हैं, क्योंकि स्कूलों में अन्य विकल्प स्वीकार नहीं किए जाते। शिक्षा माफियाओं का जाल? ...

चढ़ावे की चोरी का पैसा जमीन-मकान में लगा? अयोध्या में दो और कर्मी पकड़े गए: सूत्र

अयोध्या के श्री राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के मामले में ट्रस्ट के दो और कर्मचारियों को पकड़ा गया है, जिन्होंने चोरी के पैसे से करोड़ों रुपये की जमीन और मकान खरीदे हैं। जांच एजेंसियों और पुलिस सूत्रों के अनुसार, इन कर्मचारियों का मासिक वेतन मात्र 18 से 20 हजार रुपये था, लेकिन हाल ही में इन्होंने करोड़ों की संपत्तियां अपने नाम की थीं। इस मामले से जुड़ी मुख्य जानकारियां इस प्रकार हैं: संदिग्ध कर्मचारी और खरीदी गई संपत्तियां लवकुश मिश्रा : मंदिर के दान-गिनती विभाग (कैलकुलेशन रूम) में काम करने वाले इस कर्मचारी को हिरासत में लिया गया है। इसने अयोध्या में 40 लाख रुपये का एक भूखंड खरीदा और उस पर मकान का निर्माण शुरू करवाया। छापेमारी के दौरान इसके घर से करीब 10 लाख रुपये की नकदी भी बरामद की गई है, जिसे अलमारी और गोबर के ढेर में छुपाकर रखा गया था।   तिवारी (गर्भगृह कर्मी) : राम मंदिर के गर्भगृह में तैनात इस कर्मी के पास भक्तों द्वारा चढ़ाए गए सोने-चांदी के आभूषणों को इकट्ठा करने की जिम्मेदारी थी। इसने कुछ महीने पहले अयोध्या में 1.5 करोड़ रुपये की महंगी जमीन खरीदी थी। जांच और बड़ी कार्रव...

16 से कम उम्र के बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया!

कोर्ट की टिप्पणी ने एक नई बहस छेड़ दी है कि क्या भारत में भी बच्चों के लिए फेसबुक-इंस्टाग्राम के दरवाजे बंद होने वाले हैं?" मदुरै (तमिलनाडु): सोशल मीडिया की दुनिया बच्चों की मासूमियत के लिए अब एक बड़ा खतरा बनती जा रही है. अश्लील सामग्री की आसान पहुंच और रील की लत से बच्चों को बचाने के लिए अब मद्रास हाई कोर्ट ने एक बेहद सख्त रुख अपनाया है. ऑस्ट्रेलिया में 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर लगे सोशल मीडिया बैन का उदाहरण देते हुए अदालत ने केंद्र सरकार से भारत में भी इसी तरह की पाबंदी लागू करने पर विचार करने को कहा है. मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ ने केंद्र सरकार को 16 साल से कम उम्र के बच्चों के सोशल मीडिया वेबसाइटों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगाने की सलाह दी है. न्यायमूर्ति जी. जयचंद्रन और न्यायमूर्ति के.के. रामकृष्णन की पीठ ने याचिका पर सुनवाई की. केंद्र और राज्य सरकारों ने इस मामले पर अपने तर्क पेश किए. सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायाधीशों ने अपना आदेश जारी किया. पीठ ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा 2017 में जारी आदेश के अनुसार, यह पुष्टि हो चुकी है कि ऐसे विवादास्पद और अश्लील ...